HCS-Oct’17

HCS-Oct: अक्टूबर महीने का हनुमान चालीसा सत्संग का कार्यक्रम दिनांक  २९ अक्टूबर को वेदांत आश्रम के शंकराचार्य सभागृह में आयोजित हुआ। कार्यक्रम का प्रारम्भ पूर्ववत सुन्दर  भजनों  से हुआ, और फिर सबने हनुमान चालीसा का पाठ  किया। तदुपरांत  पूज्य गुरूजी ने हनुमान चालीसा की २२ वीं  चौपाई पर अपना प्रवचन प्रारम्भ किया – सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक कहु को डरना। 

उन्होंने कहा की जो भी हनुमानजी की शरण में जाता है उसे सब प्रकार के सुख प्राप्त हो जाते हैं, तथा उसके सब प्रकार के डर भी समाप्त हो जाते हैं। इस चौपाई में एक बहुत मूलभूत बात कही जा रही है।  एक तो प्रत्येक मनुष्य सुख और सुरक्षा प्राप्त करने के लिए सतत लगा रहता है, दूसरी बात यह है, की ये दोनों चीजें हमारे अभिमान के करना ही अप्राप्य हो जाती हैं, न की किसी बाहरी कारणों  से, और जैसे ही मनुष्य शरणागति की अंतःस्थिति को प्राप्त करता है फिर मनो जिसके प्रति वो शरणागत होता है वो देवता उसे इन दोनों जरूरतों को पूरा कर देता है। सुख और सुरक्षा की प्राप्ति का रहस्य शरणागति के रहस्य में छुपा हुआ है। स्वामीजी ने हनुमानजी के अनेकानेक भक्तों के दृष्टांत दिए जिन्होंने हनुमानजी के प्रति शरणागति के करना जीवन में अकल्पनीय सुख और समृद्धि प्राप्त की। उनमे गोस्वामी तुलसीदास जी भी शामिल हैं, आधुनिक काल में एप्पल कंपनी के स्टीव जॉब्स भी हनुमानजी के ऐसे ही भक्तों में एक हैं।  वे नैनीताल के पास स्थित नीमकरोली बाबा के आश्रम में रहे थे और बाबाजी हनुमानजी के बहुत बड़े भक्त थे, उनके जीवन में उनकी कृपा से बहुत बड़ा परिवर्तन आया।

जब तक मनुष्य मूलभूत सुख और सुरक्षा प्राप्त नहीं कर लेता है तब तक वह निःस्वार्थ नहीं हो पता है, और जब तक निःस्वार्थ नहीं होता है तब तक वो अच्छा और बड़ा सोच भी नहीं पता है।  इस लिए इन दोनों आवशयक्ताओं की पूर्ती जीवन के साफल्य के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं। पूज्य गुरूजी ने कहा की – शरणागति क्या होती है और कैसे करि जाती है – इस विषय में हम लोग अगली सत्र में प्रवेश करेंगे।

इसी दिन अभी दो दिन पूर्व समाप्त हुए गीता ज्ञान यज्ञ के उपलक्ष्य में एक भंडारे का भी आयोजन हुआ। विशेष प्रसन्नता की बात यह थी की उस दिन आंवला नवमी का शुभ पर्व भी था, इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा होती है और इसके निचे बैठ के भोजन भी किया जाता है। इसके बारे में कथा आती है की इस दिन आंवले के पेड़ में भगवन विष्णु और शिवजी दोनों का वास होता है। आश्रम में एक आंवले के पेड़ की व्यवस्था की गयी और उसकी पूजा की तैयारी भी की गयी, अनेकों भक्तों ने पूजा का आनंद लिया और सुंदरता से सजाय गए पेड़ की परिक्रमा की। बाद में श्री सुनील गर्ग जी के द्वारा सभी को भंडारे प्रसाद का आयोजन किया गया।

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